indian culture essay in hindi

Indian Culture essay in Hindi

यह निबंध bhartiya sanskriti  के सभी गुणों को विस्तार से परिभाषित करता है  | Indian Culture / Bhartiya Sabhyata को संछेप में समझने में ये Nibandh सक्षम है |  यह निबंध जानकारियों से भरपूर है और सभी Class के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है |

भूमिका  :-    संस्कृति का शाब्दिक अर्थ है भली प्रकार संस्कार किया गया | संस्कृति अंग्रेजी शब्द कल्चर का पर्याय है | संस्कृति की परिभाषा करना सरल नहीं होता क्योंकि संस्कृति का कोई साकार रूप नहीं होता वह तो एक मुर्ख भावना होती है | एक विद्वान ने संस्कृति को परिभाषा की इस प्रकार की है – “किसी राष्ट्र और समाज की श्रेष्ठतम उपलब्धियां ही संस्कृति है” | स्पष्ट है कि संस्कृति समाज व राष्ट्र की सदियों की उपलब्धियों का समूह है | संस्कृति में भूत और वर्तमान के आध्यात्मिक सामाजिक और धार्मिक मूल्यों का समावेश होता है, जो  किसी समाज या राष्ट्र की पहचान होते हैं |

Indian Culture essay in Hindi

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विषयविस्तार :-   भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृति में से एक है| यह आज भी जीवित है | रोम मिश्री जैसी सभ्यताओं और संस्कृतियों का आज कहीं अता-पता नहीं पर भारतीय संस्कृति आज भी जीवित है | सदियों से दुश्मनों ने इसे मिटाने की भरपूर कोशिश की मगर वह नष्ट ना हो सकी | इकबाल ने ठीक ही कहा है :-

यूनान मिस्र रोमा सब मिट गए जहां से

बाकी अभी तलक है नामो मोनिशा हमारा | | 

दुनिया के अन्य देश जब पाषाण युग में ही जी रहे थे उस समय भी हमारी संस्कृति उच्चता को प्राप्त थी इसी संस्कृति ने दुनिया को ज्ञान का आलोक दिया |

Indian Culture essay in Hindi :-  भारतीय संस्कृति अत्यंत महान है | इसकी सबसे बड़ी विशेषता है,  विभिन्नता में एकता की भावना | भारत में अनेक प्रकार के भौगोलिक, रीति-रिवाज और रहन-सहन संबंधी, भाषा एवं साहित्य संबंधी, धर्म, संप्रदाय संबंधित मत संबंधी तथा परंपराओं और आस्था संबंध भिन्नता विद्यमान है , तथापि कश्मीर से कन्याकुमारी तथा असम से गुजरात तक भी लोग एक सूत्र में बंधे हैं | हमारे धार्मिक ग्रंथ; जीवन-दर्शन, तीर्थ स्थान, पूजा-पद्धति आदि में अद्भुत समानता है | सभी भारतीय आशावादी है और अध्यात्म में विश्वास रखते हैं | हमारी संस्कृति समन्वयवादी है | ईश्वर में विश्वास, उदारता एवं मानव कल्याण की भावना हमारी संस्कृति की अनूठी पहचान है | धर्म और दर्शन की दृष्टि से संपूर्ण भारतवर्ष एक है | भारतीय संस्कृति सहिष्णु भी है | अनेक धर्मो एवं मतों को इसमें ग्रहण कर लिया है | प्रसाद जी ने ठीक ही कहा है –“ यवन को दिया दया का दान सिंह को मिली धर्म की दृष्टि हमारी संस्कृति हमें शांति अहिंसा उदारता दया और क्षमा का पाठ पढ़ाती है”,  जीवन के चार आश्रम एवं चार पुरुषार्थ भारतीय संस्कृति की ही देन है | इसी संस्कृति ने विश्व को ‘पंचशील’,’ विश्वबंधुत्व’ तथा ‘परोपकार’ का पाठ पढ़ाया | भारतीय संस्कृति का आदर्श है – ‘

सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया

सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चित् दुख भाग् भावेत् ‘|

ऊपर के श्लोक में आप देख सकते हैं कि यह श्लोक पूरे संसार की संतुष्टि और सुखी होने की कामना करता है यही भारतीय संस्कृति की पहचान है | भारतीय संस्कृति पूरे विश्व के कल्याण और संतुष्ट की कामना करता है |

उपसंहार : भारतीय संस्कृति गंगा की सीन पवित्र धारा है, जो सदियों से प्रवहमान है | दुर्भाग्य से आज हम अपनी संस्कृति से दूर होते जा रे | पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध में हमें भ्रमित कर दिया है तथा हम भारतीय संस्कृति के उच्च आदर्शों जीवन मूल्य तथा गौरवशाली परंपराओं को विस्मृत करते जा रहे हैं | विडंबना यह है कि आज की शिक्षा पद्धति में भी भारतीय संस्कृति तथा इसके मूलभूत तत्व को कोई स्थान नहीं दिया गया है | इसके कारण युवा भारत में तो अपनी संस्कृति के प्रति आस्था श्रद्धा विश्वास एवं आदर की भावना का अभाव है | आज इस बात की अधिक आवश्यकता है कि हम अपने गौरवशाली संस्कृति को अपने जीवन में अपनाएं तथा उन्हीं के अनुकूल चलने का प्रयास करें |

 

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